उत्तर भारत में बर्फीली हवाओं का प्रकोप और शीतलहर की चेतावनी
नए साल के पहले सप्ताह में ही उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में कड़ाके की ठंड ने दस्तक दे दी है। मौसम विभाग (Skymet Weather) के अनुसार, पंजाब के ऊपर बना चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र अब पूरी तरह से समाप्त हो गया है, जिससे पहाड़ों से आने वाली सीधी बर्फीली हवाओं का रास्ता साफ हो गया है। इसके चलते पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अगले ४८ घंटों में राजस्थान और हरियाणा के कई जिलों में ‘भीषण शीतलहर’ (Severe Cold Wave) चलने की संभावना है। तापमान में इस गिरावट के कारण फसलों पर पाला (Ground Frost) गिरने का भी खतरा मंडरा रहा है, जो किसानों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
कोहरे की स्थिति और दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से राहत
उत्तर भारत में तेज हवाओं के चलने से दिल्ली-एनसीआर के लोगों को एक बड़ी राहत मिली है। हवा की गति बढ़ने से वायु प्रदूषण के स्तर में काफी सुधार हुआ है और घने कोहरे की चादर भी अब छंटने लगी है। हालांकि, उत्तर प्रदेश और बिहार के पूर्वी हिस्सों में अभी भी सुबह के समय मध्यम से घना कोहरा देखा जा सकता है। दिल्ली में न्यूनतम तापमान ५ से ६ डिग्री सेल्सियस तक रहने का अनुमान है, जबकि हरियाणा के हिसार और राजस्थान के सीकर जैसे इलाकों में पारा २ से ३ डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क सकता है। दिन के समय धूप निकलने की संभावना है, जिससे दोपहर की सर्दी से थोड़ी राहत मिलेगी।
पहाड़ों पर बर्फबारी और दक्षिण भारत में बारिश का दौर
पहाड़ी राज्यों की बात करें तो जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और गिलगित-बाल्टिस्तान के ऊंचे शिखरों पर हल्का हिमपात जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, शिमला, नैनीताल और मसूरी जैसे पर्यटन स्थलों के निचले इलाकों में अभी भी भारी बर्फबारी का इंतजार बना हुआ है। दक्षिण भारत में मौसम का मिजाज थोड़ा अलग है; केरल और तमिलनाडु के कई जिलों में अगले ३-४ दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी। लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी बादलों की आवाजाही के साथ छिटपुट बौछारें पड़ने के आसार हैं।
क्लाइमेट चेंज और मानसून २०२६ पर ‘अल नीनो’ का खतरा
मौसम विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन को लेकर एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष २०२५ अब तक का ८वां सबसे गर्म साल दर्ज किया गया है और २०२६ में भी वैश्विक तापमान बढ़ने के संकेत हैं। वर्तमान में ‘ला नीना’ की स्थिति बनी हुई है, जो फरवरी-मार्च २०२६ तक न्यूट्रल (तटस्थ) हो जाएगी। सबसे बड़ी चिंता आगामी मानसून को लेकर है, क्योंकि कई अंतरराष्ट्रीय मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि २०२६ के मानसून सत्र के दौरान ‘अल नीनो’ (El Niño) सक्रिय हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो भारत में मानसून की बारिश सामान्य से कम हो सकती है। स्काईमेट जनवरी के दूसरे सप्ताह में इस पर अपना विस्तृत वार्षिक पूर्वानुमान जारी करेगा।



